Highlights
- कनॉट प्लेस में दुकानदारों ने 'दिल्ली पुलिस आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं' के नारे लगाए।
- नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन का दावा, प्रदर्शनों से रोजाना 100 करोड़ रुपये का नुकसान।
- खान मार्केट के व्यापारी भी परेशान, त्योहारों में नुकसान के बाद मुआवजे की मांग पर विचार।
नई दिल्ली: दिल्ली के कनॉट प्लेस में शुक्रवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला। पिछले 15 दिनों में पहली बार प्रदर्शन के दौरान दुकानें और रेस्तरां खुले रहे। आम लोगों के आने-जाने पर भी पाबंदी नहीं थी। इस दौरान दुकानदारों और व्यापारियों ने नारे लगाए, 'दिल्ली पुलिस आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।' दरअसल, सेंट्रल दिल्ली में बार-बार होने वाले प्रदर्शनों, बाजार बंद होने और कारोबार को हो रहे नुकसान से व्यापारी परेशान हैं। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के नाम पर दिल्ली के प्रमुख कारोबारी इलाकों को बार-बार ठप किया जा रहा है।
'प्रदर्शन के नाम पर सेंट्रल दिल्ली को बनाया जा रहा निशाना'
दिल्ली की ट्रेड यूनियंस का कहना है कि राजनीतिक दल हर कुछ दिनों के अंतराल पर सेंट्रल दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन करने पहुंच जाते हैं। व्यापारियों का आरोप है कि जानबूझकर कनॉट प्लेस जैसे बिजनेस हब को चुना जाता है, जिससे दुकानों और कारोबार पर सीधा असर पड़ता है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले हंगामे के कारण उनका व्यापार लगभग ठप हो गया है। व्यापारियों ने प्रदर्शनकारियों के विरोध में आवाज उठाते हुए पुलिस का समर्थन किया। उनका कहना है कि वे विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके नाम पर बाजारों को बंद कराने और कारोबार को नुकसान पहुंचाने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो रहा है।
त्योहार का सीजन, फिर भी दुकानों पर ग्राहक नहीं
व्यापारियों के मुताबिक, त्योहारों के मौसम में बाजारों में सबसे ज्यादा बिक्री होती है। दुकानदार पूरे साल इस सीजन का इंतजार करते हैं, लेकिन इस बार हालात उलट हैं। कनॉट प्लेस के शोरूम और रेस्तरां ग्राहकों की कमी से जूझ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि उनकी बिक्री लगातार गिर रही है और त्योहारों के बावजूद उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका दावा है कि जब भी किसी राजनीतिक दल के प्रदर्शन की घोषणा होती है, तो दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ती हैं। इतना ही नहीं, प्रदर्शन नहीं होने पर भी ग्राहक सेंट्रल दिल्ली आने से बचते हैं। लोगों को डर रहता है कि कहीं अचानक कोई पार्टी झंडे-बैनर लेकर न पहुंच जाए, हंगामा न हो जाए और उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।
कनॉट प्लेस ही नहीं, खान मार्केट के व्यापारी भी परेशान
प्रदर्शनों के कारण कारोबार पर पड़ने वाला असर केवल कनॉट प्लेस तक सीमित नहीं है। उससे सटे खान मार्केट के दुकानदार भी भारी नुकसान की शिकायत कर रहे हैं। खान मार्केट ट्रेडर्स यूनियन अब सरकार से मुआवजे की मांग करने पर विचार कर रही है। यूनियन का कहना है कि पहले त्योहारों के सीजन में दुकानदारों की अच्छी कमाई होती थी, लेकिन इस बार उन्हें मुनाफे के बजाय नुकसान झेलना पड़ रहा है। खान मार्केट ट्रेडर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव मेहरा का दावा है कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि बड़े दुकानदार भी खान मार्केट छोड़कर दूसरी जगह जाने लगे हैं।
सौरभ भारद्वाज बोले, 'प्रदर्शन से बढ़ता है कारोबार'
इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी ने दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि प्रदर्शन होने से दुकानदारों का कारोबार बढ़ता है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचते हैं और इससे बिक्री में इजाफा होता है। भारद्वाज का कहना है कि सरकार प्रदर्शन होने नहीं दे रही है, इसलिए दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, व्यापारियों का अनुभव इससे अलग है। उनका कहना है कि प्रदर्शनों के कारण ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पाते, दुकानें बंद करनी पड़ती हैं और कारोबार पर बुरा असर पड़ता है।
'20-25 लोग भी शोर मचाएं तो करोड़ों का नुकसान'
शुक्रवार को कनॉट प्लेस में दुकानें और रेस्तरां खुले रहने के दौरान व्यापारियों ने पुलिस के समर्थन में नारे लगाए। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की थी, जिनकी वहां दुकानें और रेस्तरां हैं। व्यापारियों का कहना है कि कई बार केवल 20-25 लोगों के इकट्ठा होकर शोर मचाने से भी दुकानदारों को दुकानें बंद करनी पड़ती हैं। इससे उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है। नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन का दावा है कि प्रदर्शन के कारण पूरे नई दिल्ली इलाके में रोजाना करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों ने इसी नुकसान और बार-बार बाजार बंद होने की समस्या को देखते हुए पुलिस के समर्थन में आवाज उठाई।
व्यापारियों की मांग, 'बाजारों को प्रदर्शन के असर से बचाया जाए'
व्यापारियों की मुख्य चिंता यह है कि राजनीतिक प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के प्रमुख कारोबारी इलाकों में सामान्य जनजीवन और कारोबार प्रभावित नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि जब ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंच पाते, तो दुकानदारों के साथ-साथ रेस्तरां, कर्मचारियों और कारोबार से जुड़े दूसरे लोगों की कमाई पर भी असर पड़ता है। बता दें कि पहले भी प्रदर्शनों के दौरान दुकानदारों से जुड़ी एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें उनका कहना था कि ऐसे माहौल में दुकान खोलने से डर लगता है।
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